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Monday, 8 March 2021 - 12:30am

नई दिल्ली एलजीबी से जुड़े लोगों पर हुए एक हालिया अध्ययन ने सबको चौंकाकर रख दिया है। दरअसल, रिसर्च में कहा गया है कि लेस्बियन, गे या बायसेक्सुअल (एलजीबी) लोगों में मानसिक परेशानियां बाकी लोगों की तुलना में अधिक देखी जाती है। इतना ही नहीं इन लोगों में हेट्रोसेक्सुअल लोगों की तुलना में शराब और ड्रग्स का दुरुपयोग भी अधिक देखा गया है।
बता दें, यह रिसर्च ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं ने ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के साथ मिलकर की है। मनोवैज्ञानिक चिकित्सा में प्रकाशित यह निष्कर्ष, स्पष्ट रूप से ऐसे संबंधों के प्रति अधिक सहिष्णु सामाजिक दृष्टिकोण को बताते हैं।
इस निरंतर असमानता को देखते हुए शोधकर्ताओं ने इन लोगों की स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल से जुड़ी सेवाओं में समानता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी कार्रवाई की मांग की है। यह शोध स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच यौन अल्पसंख्यक समूहों की मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं में सुधार लाने और ऐसी नीतियों के बारे में जिससे सामाजिक समझ में सुधार लाया जा सके बात करता है। इसके लिए स्कूलों को प्रोत्साहित करने से पहले पूरे समुदाय में यौन अल्पसंख्यकों के प्रति सहिष्णु दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत बताई गई है।
वयस्क मनोचिकित्सा रुग्णता सर्वेक्षणों के आंकड़ों के अनुसार साल 2007 और 2014 में 16-64 आयु वर्ग के 10,433 लोगों के नमूने लिए गए। यह सर्वेक्षण आमने-सामने हुए साक्षात्कार और कंप्यूटर स्व-समापन, यौन अभिविन्यास, सामान्य मानसिक विकार, अल्कोहल का अधिक उपयोग और अवैध दवा के उपयोग से संबंधित मौजूदा आंकड़ों के आधार पर किया गया। इसके अलावा बाकी जानकारी मनासिक तनाव और भेदभाव, धार्मिक पहचान और बचपन में हुए यौन शोषण के अनुभवों से जुड़ी एकत्र जानकारी के आधार पर प्राप्त की गई।
साल 2007 और 2014 के आंकड़ों के इस विश्लेषण को देखते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि 2007 और 2014 में लोगों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। ये लोग बाकी लोगों की तुलना में बेहद खराब मानसिक स्वास्थ्य से जुझ रहे होते हैं।
इसी तरह, बाइसेक्सुअल लोगों में अवैध दवाओं का उपयोग 37 प्रतिशत अधिक था, जबकि समलैंगिक लोगों में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत और विषमलैंगिक लोगों में 10.5 प्रतिशत था। रिसर्च में पाया गया कि समलैंगिक लोगों में शराब का सेवन 37 प्रतिशत अधिक था। जबकि बाइसेक्सुअल लोगों में यह प्रतिशत 31 प्रतिशत और विषमलैंगिक लोगों में यह 24 प्रतिशत रहा।

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