गौ-तस्कर ने छोड़ा अपराध, खोला ढाबा, एसएसपी बने पहले ग्राहक


जशपुर पुलिस के “ऑपरेशन शंखनाद” का बड़ा सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। साईंटांगरटोली का कुख्यात गौ-तस्कर अमजद हजाम उर्फ बबलू अब अपराध की दुनिया छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ गया है। गुरुवार को उसने अपना नया ढाबा “बबलू शंख ढाबा” शुरू किया, जिसका उद्घाटन खुद एसएसपी शशि मोहन सिंह ने किया। खास बात यह रही कि ढाबे के पहले ग्राहक भी एसएसपी ही बने।

जशपुर जिले का साईंटांगरटोली क्षेत्र लंबे समय से गौ-तस्करी की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। इसी इलाके का रहने वाला अमजद उर्फ बबलू कई वर्षों से गौ-तस्करी में सक्रिय था। उसके खिलाफ थाने में तीन मामले दर्ज थे और पिछले आठ महीनों से पुलिस की पकड़ से बचता फिर रहा था। लेकिन जशपुर पुलिस की सख्त मॉनिटरिंग और दबाव के कारण आखिरकार उसने सरेंडर कर दिया।

जेल से बाहर आने के बाद एसएसपी ने अमजद को अपने कार्यालय बुलाकर उसे अपराध छोड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने की सलाह दी। एसएसपी की बातों का अमजद पर गहरा असर हुआ और उसने अपराध छोड़ने का निर्णय ले लिया।

नयी शुरुआत के लिए अमजद ने छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा पर “बबलू शंख ढाबा” शुरू किया। उद्घाटन के लिए उसने एसएसपी को आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उद्घाटन समारोह में एसएसपी ने चाय पीकर उसकी कीमत भी चुकाई और अमजद को शुभकामनाएँ दीं। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, व्यापारी, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि : “अपराध कोई विकल्प नहीं है। कोई भी व्यक्ति यदि सही रास्ता चुनना चाहता है, तो जशपुर पुलिस उसके साथ खड़ी है। यह कम्युनिटी पुलिसिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।”

उद्घाटन कार्यक्रम में कई युवाओं ने भी अपराध का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प दोहराया। जशपुर पुलिस के इस प्रयास को जिले में एक सकारात्मक समाज-पुनर्वास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

अमजद का कहना है : एसएसपी साहब ने मुझे समझाया, तब पहली बार महसूस हुआ कि जिंदगी बदल सकती है। अब मैं अपराध से हमेशा के लिए दूर रहूंगा और ईमानदारी से अपने परिवार का पेट पालूंगा।

जशपुर पुलिस की यह पहल न सिर्फ एक व्यक्ति के जीवन को बदल रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और सकारात्मक माहौल पैदा करने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित हो रही है।

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