अवैध रेत उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई, 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त

Report by manisha yadav

रायपुर, वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा अवैध कटाई, अतिक्रमण और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रबंध संचालक के निर्देश पर सभी परियोजना मंडलों में नियमित दिन एवं रात्रि गश्त की जा रही है, जिसका सकारात्मक प्रभाव वन सुरक्षा पर दिखाई दे रहा है।

अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई 5 ट्रैक्टर ट्रॉलियों को मौके पर किया गया जब्त

अवैध रूप से रेत उत्खनन करते 5 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मौके पर किया जब्त

           कोटा परियोजना मंडल, बिलासपुर की टीम ने गश्ती के दौरान अरपा नदी से अवैध रूप से रेत उत्खनन करते हुए 5 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मौके पर पकड़ा। यह कार्रवाई कलमीटार बीट के कक्ष क्रमांक पी-1586 में की गई। सभी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में रेत भरी हुई थी, जिसमें लगभग 11 घन मीटर अवैध रेत जब्त की गई। पकड़े गए सभी ट्रैक्टर वाहन स्वामियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33 (1ख) के तहत वन अपराध दर्ज किया गया है। प्रकरण क्रमांक 87/18 बनाकर वाहनों को राजसात करने हेतु अधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया की जा रही है।

अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई 5 ट्रैक्टर ट्रॉलियों को मौके पर किया गया जब्त

वाहन मालिक पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट हटा देता था

          जांच में यह भी सामने आया कि अवैध उत्खनन के मामलों में कई बार वाहन मालिक पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट हटा देता हैं, लेकिन चेसिस नंबर के आधार पर परिवहन विभाग से वाहन मालिक की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह अभियान क्षेत्रीय महाप्रबंधक बिलासपुर श्री अभिषेक सिंह एवं मंडल प्रबंधक कोटा परियोजना मंडल श्री सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन में परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी श्री वैभव साहू के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संचालित किया गया। अभियान में वन विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल रहे।

सतर्कता के साथ प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश

         वन अपराध पर त्वरित और सख्त कार्रवाई के लिए प्रबंध संचालक श्री प्रेमकुमार ने पूरी टीम को बधाई दी है। साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को वन क्षेत्रों में इसी प्रकार सतर्कता के साथ प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। आगामी वर्ष के गोपनीय प्रतिवेदन में वन सुरक्षा एवं संवर्धन में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख किया जाएगा।

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