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छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, 87 हजार से बढ़कर 1.13 लाख हेक्टेयर हुआ रकबा

Report by manisha yadav

रायपुर । छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली है। दुर्ग क्षेत्र के तांदुला जल संसाधन संभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के बाद सिंचाई का रकबा 87,930 हेक्टेयर से बढ़कर 1,13,538 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। नहरों के विस्तार, सिंचाई परियोजनाओं और जल संरक्षण के प्रयासों से कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

97 से बढ़कर 118 हुईं सिंचाई परियोजनाएं

तांदुला जल संसाधन संभाग के अंतर्गत वर्ष 2000 में 97 सिंचाई परियोजनाएं संचालित थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 118 हो गई है। वहीं, नहरों की कुल लंबाई 1,148 किलोमीटर से बढ़कर 1,349 किलोमीटर हो गई है। इससे सिंचाई जल के वितरण का दायरा बढ़ा है।

विभाग के अनुसार, नहरों की लाइनिंग, जल संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण और गेट स्वचालन जैसी तकनीकों के जरिए पानी की बर्बादी कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उद्वहन सिंचाई योजनाओं से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक भी पानी पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

बड़ी परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा का विस्तार

दुर्ग और बालोद क्षेत्र में जलापूर्ति तथा सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के लिए खरखरा-शिवनाथ नदी पाइपलाइन योजना और तांदुला ऑगुमेंटेशन सहगांव उद्वहन सिंचाई योजना जैसी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उपलब्ध विभागीय जानकारी के मुताबिक, इन परियोजनाओं से लगभग 18 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिली है।

भू-जल स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष 265 रिचार्ज पिट और 300 सोक पिट का निर्माण भी किया गया है। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन, जलाशयों की मरम्मत और गाद निकालने जैसे कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है।

42 हजार से अधिक किसानों को मिला लाभ

विभाग के अनुसार, तांदुला जल संसाधन संभाग के प्रयासों से 42 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष सिंचाई सुविधा मिली है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसानों को फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और कृषि कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।

पानी के बेहतर उपयोग के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक जल उपयोगिता समितियों के माध्यम से जल वितरण में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि आधारित गतिविधियों, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

जल संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीक पर जोर

जल संसाधन विभाग सिंचाई व्यवस्था की निगरानी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। डीजीपीएस, ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस मानचित्रण से सर्वेक्षण कार्यों को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए नहरों और जलाशयों की निगरानी की जा रही है।

ई-ऑफिस और ऑनलाइन परियोजना ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। तालाबों, बांधों और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण के साथ भू-जल पुनर्भरण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

भविष्य में सिंचाई क्षमता बढ़ाने की योजना

विभाग की आगामी योजनाओं में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का विस्तार, नहरों का आधुनिकीकरण और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा, एनीकट को बैराज में बदलने जैसी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

जल संसाधन विभाग का लक्ष्य सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करते हुए उपलब्ध जल का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि किसानों को खेती के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को मजबूती मिले।

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