छत्तीसगढ़ी अस्मिता के उत्थान में विधायक पुरंदर मिश्रा ने राजभाषा दिवस में भरी संस्कृति–गौरव की नई हुंकार

छत्तीसगढ़ी के सम्मान की हुंकार—विधायक पुरंदर मिश्रा ने राजभाषा मंच से दिया सांस्कृतिक संकल्प

छत्तीसगढ़ी गौरव का महाउत्सव—पुरंदर मिश्रा की उपस्थिति से कार्यक्रम में भरी नई ऊर्जा

रायपुर।छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा महंत सर्वेश्वर दास सभागार, घड़ी चौक में आयोजित छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस कार्यक्रम में उत्तर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक माननीय पुरंदर मिश्रा जी ने शामिल होकर छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और लोकपरंपरा के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

कार्यक्रम के शुभारंभ में माननीय मंत्री श्री राजेश अग्रवाल जी के साथ दीप प्रज्वलन कर भाषाई गौरव के इस समारोह की शुरुआत की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, भाषा–विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे।

“छत्तीसगढ़ी को 8वीं अनुसूची में शामिल करना समय की माँग”—पुरंदर मिश्रा

विधायक मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा छत्तीसगढ़ की आत्मा है और इसे 8वीं अनुसूची में शामिल कर राष्ट्रीय स्तर पर उचित स्थान दिलाना राज्यवासियों का गौरव होगा। उन्होंने नागरिकों से छत्तीसगढ़ी को व्यवहार, साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में और अधिक अपनाने का आग्रह किया।

साहित्यकारों का सम्मान और पुस्तक विमोचन

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवियों, लेखकों और साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन एवं सम्मान किया गया। मिश्रा जी ने साहित्यकारों को छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि साहित्य ही संस्कृति को जीवन देता है।

संग्रहालय भ्रमण: संस्कृति की जड़ों से जुड़ने का अवसर

विधायक मिश्रा ने सांस्कृतिक संग्रहालय का अवलोकन कर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों, लोकनृत्य, लोकगाथा, जनजातीय जीवन और परंपराओं को निकट से जाना। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास अत्यंत समृद्ध और विश्व अनूठी सांस्कृतिक पहचान वाला है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल जी, धरसीवां विधायक अनुज शर्मा जी,छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा जी, छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन जी, तथा अनेक जनप्रतिनिधि व नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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