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गायब कांस्टेबल और फर्जी हाजिरी का बड़ा मामला: 4 अधीक्षक सस्पेंड, शराबी शिक्षक पर भी कार्रवाई

Report by manisha yadav

बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में अनुशासनहीनता और लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थिति रहने वाले एक आरक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. आरक्षक राहुल शर्मा को ‘सेवा से अलग’ करने का आदेश जारी किया.
आरक्षक राहुल शर्मा दिनांक 5 अप्रैल 2025 से लगातार बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के अनधिकृत रुप से गैरहाजिर थे. पुलिस की जांच में पाया गया कि वे कुल 311 दिनों तक ड्यूटी पर गैरहाजिर रहे. विभागीय जांच के दौरान उन्हें बार-बार नोटिस जारी किए गए और जांच में हाजिर होने का पर्याप्त मौका दिया गया. लेकिन वे जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए. इससे उनकी लापरवाही और अनुशासनहीनता साबित हुई.
आरक्षक की सेवा पुस्तिका के अवलोकन से पता चला कि उनके पूरे सेवाकाल में कुल 14 बार कर्तव्य से गैरहाजिर रहने के मामले दर्ज हैं. यह बार-बार की अनुपस्थिति उनके चरित्र और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को दर्शाती है. पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने इस मामले में अब कार्रवाई की है.

जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल द्वारा सहायक शिक्षक एलबी प्राथमिक शाला फाफनी विकासखण्ड-बस्तर अंशुराम कमार को कर्तव्य में लापरवाही बरतने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. जारी आदेश के मुताबिक कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बस्तर के जरिए अंशुराम कमार सहायक शिक्षक एलबी प्राथमिक शाला फाफनी विकासखण्ड-बस्तर के द्वारा नियमित शराब सेवन कर अध्यापन कार्य करने एवं शासकीय आदेशों एवं निर्देशों की अवहेलना करना और शासकीय कार्यों में लापरवाही किए जाने संबंधी मिले प्रस्ताव के आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के उपनियम के उल्लंघन का प्रथम दृष्ट्या दोषी पाये जाने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.
निलंबन अवधि में अंशुराम कमार सहायक शिक्षक एलबी का मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बास्तानार निर्धारित किया जाता है. संबंधित को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी. यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा.

बीजापुर : बीजापुर के पोटाकेबिनों आवासीय विद्यालयों में हुए वित्तीय अनियमितता और राशन घोटाले के मामले में संयुक्त संचालक शिक्षा ने चार प्रभारी अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
जांच दल जब बीजापुर के विभिन्न पोटाकेबिनों में पहुंचा तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. जिन विद्यालयों में कागजों पर बच्चों की उपस्थिति शत-प्रतिशत दिखाई गई थी. वहां मौके पर आधे बच्चे भी मौजूद नहीं थे. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जुलाई से अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में बच्चे अनुपस्थित थे. लेकिन उनके नाम पर राशन सब्जी और मेष शुल्क का पैसा सरकारी खजाने से लगातार निकाला जा रहा था.
हैरानी की बात यह है कि अधीक्षकों ने अपनी चोरी छिपाने के लिए उपस्थिति पंजी में जमकर कांट-छांट और हेरफेर की. बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर शासन को लाखों रुपये का चूना लगाया गया. यह खेल केवल राशन तक सीमित नहीं था बल्कि बच्चों को मिलने वाली शिष्यवृत्ति की राशि में भी डाका डाला गया.
कलेक्टर बीजापुर की अनुशंसा के बाद बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक ने चार प्रभारी अधीक्षकों को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया है.

दुर्ग : दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने प्रशासनिक अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पशु चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम-1966 के नियम-9 (1) (क) के अंतर्गत डॉ. चन्द्रशेखर अम्बुलकर, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ एवं विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी मोहला के विरुद्ध यह कार्रवाई की गई है। जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान डॉ. अम्बुलकर का मुख्यालय कार्यालय उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला राजनांदगांव निर्धारित किया गया है. इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. 
यह कार्रवाई कलेक्टर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के प्रतिवेदन के आधार पर की गई है. प्रतिवेदन में डॉ. अम्बुलकर के खिलाफ शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने के गंभीर आरोप दर्ज किए गए थे.
जांच में पाया गया कि डॉ. अम्बुलकर जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में नियमित रूप से अनुपस्थित रहते थे. इतना ही नहीं, वे विभाग से संबंधित अद्यतन जानकारी देने में भी असमर्थ पाए गए. जिससे शासकीय कार्यों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था. विभागीय समन्वय और रिपोर्टिंग में भी गंभीर कमी देखी गई.
आकस्मिक निरीक्षण के दौरान डॉ. अम्बुलकर बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्यालय से अनुपस्थित मिले। इस दौरान मोबाइल लोकेशन के आधार पर यह तथ्य सामने आया कि वे महाराष्ट्र राज्य में मौजूद थे। मुख्यालय से बिना अनुमति बाहर रहना प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना गया है. जिसे गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा गया.
इसके अतिरिक्त, धान उपार्जन केंद्र भोजटोला में नोडल अधिकारी के रूप में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन उन्होंने वहां अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई. शासकीय योजनाओं से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देशों की भी उनके द्वारा निरंतर अवहेलना किए जाने की बात जांच में सामने आई. प्रशासन द्वारा जारी कारण बताओ सूचना का उनके द्वारा दिया गया उत्तर भी संतोषजनक नहीं पाया गया.
इन सभी तथ्यों को कर्तव्य निर्वहन में गंभीर कदाचार मानते हुए दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने डॉ. चन्द्रशेखर अम्बुलकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.

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