Report by manisha yadav
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद उसके सुरक्षित भंडारण और रख-रखाव को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। वर्ष 2024-25 में खरीदे गए धान में कुल 1,61,725.5 मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई है, जो कुल संग्रहण का लगभग 4.28 प्रतिशत है। सरकारी दर से इसकी कीमत आंकी जाए तो यह नुकसान 500 करोड़ रुपए से अधिक बैठता है। यह मामला अब राज्य स्तर पर गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 87 संग्रहण केंद्रों में कुल 37,76,737.8 मीट्रिक टन धान पहुंचा था। डीओ और बीओ के माध्यम से उठाव की प्रक्रिया के बाद रिकॉर्ड में करीब 1.61 लाख मीट्रिक टन धान शेष दर्शाया गया, लेकिन कई संग्रहण केंद्रों में भौतिक सत्यापन के दौरान धान की जगह सड़े हुए बोरे और खराब अनाज मिलने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले में अलग-अलग जिलों से अधिकारियों के भिन्न-भिन्न बयान सामने आ रहे हैं। हाल ही में कबीरधाम (कवर्धा) के विपणन अधिकारी का बयान चर्चा में रहा, जिसमें बड़ी मात्रा में धान को चूहों द्वारा नष्ट किया जाना बताया गया। वहीं कुछ जिलों के अधिकारी समय पर उठाव नहीं होने, खुले में भंडारण और मौसम के प्रभाव के कारण धान के सूखने व खराब होने की दलील दे रहे हैं।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिले में सबसे अधिक धान की कमी दर्ज की गई है, जबकि बीजापुर जिले में सबसे कम अंतर पाया गया है। अन्य जिलों में भी कमी सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या स्थानीय नहीं बल्कि व्यापक स्तर की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी केवल प्राकृतिक कारणों से संभव नहीं है । भंडारण व्यवस्था की खामियां, निगरानी तंत्र की कमजोरी और समय पर परिवहन नहीं होने जैसी व्यवस्थागत समस्याएं इस नुकसान की बड़ी वजह मानी जा रही हैं।
राज्य सरकार हर वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर धान खरीदी का दावा करती है, लेकिन भंडारण और रख-रखाव की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण इतनी बड़ी आर्थिक क्षति सामने आना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश देती है या नहीं, और यदि देती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की धान खरीदी व्यवस्था और भंडारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभरा है।
