गुलाबों से महकती सफलता: सूरजपुर के किसान की प्रेरक कहानी

Report by manisha yadav

सूरजपुर, यूं तो गुलाब हम सभी को बेहद पसंद होते हैं। गुलाब के विविध रंग बिना कुछ कहे ही मन को अपनी ओर खींच लेते हैं। उनकी मोहक आभा और कोमलता सहज ही मन में आकर्षण उत्पन्न कर देती है। शादी-विवाह, जन्मदिन, त्यौहार या किसी प्रियजन के चेहरे पर मुस्कान लानी हो — गुलाब का फूल या गुलदस्ता हमेशा पहली पसंद रहता है। इसी बढ़ती मांग को अवसर में बदलकर सूरजपुर जिले के ग्राम डुमरिया निवासी किसान भोला प्रसाद अग्रवाल ने आधुनिक खेती के माध्यम से सफलता की एक मिसाल कायम कर दी है।

 गुलाबों से महकती सफलता: सूरजपुर के किसान की प्रेरक कहानी

पारंपरिक खेती से आधुनिक पॉलीहाउस तक वर्ष 2023 में उन्होंने परंपरागत खेती से हटकर उन्नत तकनीक अपनाने का निर्णय लिया और 2 एकड़ भूमि में 2 पॉलीहाउस स्थापित किए। करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में लगभग 90 लाख रुपये बैंक ऋण, 30 लाख रुपये स्वयं की पूंजी तथा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से 50% अनुदान प्राप्त हुआ। पॉलीहाउस में डच किस्म के लगभग 80 हजार गुलाब पौधे लगाए गए, जो नियंत्रित तापमान और उन्नत पोषण प्रबंधन के कारण सालभर उत्पादन देते हैं।

 गुलाबों से महकती सफलता: सूरजपुर के किसान की प्रेरक कहानी
उल्लेखनीय है कि आज के समय में इस फार्म से प्रतिदिन औसतन 3 से 4 हजार गुलाब स्टिक का उत्पादन हो रहा है। तैयार फूलों की आपूर्ति बनारस, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न बाजारों में की जाती है। जिससे औसत मासिक आय 2 से 3 लाख रुपये तक होती है। इसमें  श्रमिक खर्च, खाद, उर्वरक व रखरखाव खर्चों के बाद भी यह खेती बेहद लाभकारी बनी हुई है और नियमित आमदनी का मजबूत स्रोत बन चुकी है।

किसान भोला प्रसाद अग्रवाल बताते हैं कि पारंपरिक खेती में मौसम पर निर्भरता अधिक रहती है, लेकिन इस पॉलीहाउस के आधुनिक तकनीक ने जोखिम कम कर दिया। नियंत्रित वातावरण के कारण फूलों की गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
श्री अग्रवाल जिले के अन्य किसानों के लिए संदेश देते हुए कहते हैं कि “यदि किसान नई तकनीक अपनाए और शासन की योजनाओं का लाभ ले, तो खेती को भी उद्योग की तरह सफल बनाया जा सकता है।” आज उनकी खेती न केवल परिवार की आय बढ़ा रही है, बल्कि आसपास के लोगों को रोजगार भी दे रही है। आधुनिक खेती का यह मॉडल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि सही योजना, तकनीक और मेहनत हो तो खेत भी उद्योग बन सकता है और फूल भी भविष्य बदल सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *