आईसीएआर-एनआईबीएसएम द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को प्रशिक्षण

Report by manisha yadav

रायपुर, आईसीए आर– राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, रायपुर द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने एवं मृदा स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से एक व्यापक किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बेलटुकरी, कुररा, नौगांव एवं पवनी ग्रामों के 51 किसान एवं महिला किसानों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय के संबोधन से हुआ। उन्होंने किसानों को खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों एवं महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध एवं असंतुलित उपयोग के कारण मृदा की उर्वरता एवं उसके समग्र स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मृदा की गुणवत्ता को पुनर्स्थापित करना तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर कृषि भूमि की उत्पादक क्षमता को सुदृढ़ बनाना है।

आईसीएआर-एनआईबीएसएम द्वारा "खेत बचाओ अभियान" के तहत किसानों को प्रशिक्षण

         प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को संस्थान के प्रायोगिक प्रक्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ कार्यक्रम समन्वयक एवं संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने मूंग की फसल का हरी खाद के रूप में उपयोग करने का सजीव प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि हरी खाद के प्रयोग से मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा दीर्घकालिक रूप से मृदा स्वास्थ्य एवं कृषि की स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
तकनीकी सत्रों के दौरान संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने विभिन्न प्रकार की हरी खाद वाली फसलों एवं मृदा उर्वरता बनाए रखने में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके माध्यम से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम किया जा सकता है तथा मृदा स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकीय संतुलन को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

            किसानों को संबोधित करते हुए संयुक्त निदेशक डॉ. कल्याण मंडल ने जैव उर्वरकों एवं जैव नियंत्रक एजेंटों के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने किसानों से पर्यावरण हितैषी कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया, जिससे टिकाऊ फसल उत्पादन एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

           कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित संवादात्मक सत्र में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। किसानों ने संस्थान द्वारा आयोजित व्यावहारिक प्रदर्शनों एवं ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण सत्रों की सराहना की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. के.सी. शर्मा एवं डॉ. प्रियंका मीणा का विशेष योगदान रहा, जिनके सहयोग एवं समर्पित प्रयासों से कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सका।

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