​आत्मनिर्भरता की नई मिसाल: PMEGP योजना से पंख लगे तुलेन्द्री के सपनों को

Report by manisha yadav

नारायणपुर में मिनी राईस मिल से 4 लोगों को मिला रोजगार

​रायपुर, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) देश के बेरोजगार युवाओं और पारंपरिक कारीगरों के लिए अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का एक प्रमुख साधन बना है, जिसके तहत विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है।

        मन में यदि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और शासकीय योजनाओं का सही मार्गदर्शन कैसे किसी साधारण महिला के जीवन को बदलकर उसे उद्यमी बना सकता है, इसकी जीवंत मिसाल पेश की है नारायणपुर जिले के ग्राम गुरिया की श्रीमती तुलेन्द्री ठाकुर ने। ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (PMEGP) का सहारा लेकर उन्होंने न केवल मिनी राईस मिल स्थापित की, बल्कि खुद को स्वावलंबी बनाते हुए अपने साथ-साथ चार अन्य स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा है।

*​सीमित संसाधनों से स्वरोजगार का सफर*

      नारायणपुर जिले के ग्राम गुरिया की तुलेन्द्री ठाकुर वर्षों से अपने पति श्री गजेन्द्र ठाकुर के साथ कृषि कार्यों में हाथ बंटाकर परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। सीमित आय के कारण दो बच्चों की उच्च शिक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाना एक बड़ा संकट था। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।

      ​जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, नारायणपुर के अधिकारियों की सलाह और मार्गदर्शन से उन्होंने PMEGP योजना के तहत आवेदन किया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (शाखा नारायणपुर) द्वारा उनकी 5 लाख रूपए की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें 50 हजार रुपए का स्वयं का अंशदान तथा 4.50 लाख रूपए का बैंक ऋण शामिल था।

*​”मेसर्स ठाकुर मिनी राईस मिल” की स्थापना और आधुनिक सुविधाएँ*

        ​वित्तीय सहायता मिलने के बाद तुलेन्द्री ने अपने गाँव में मेसर्स ठाकुर मिनी राईस मिल की शुरुआत की। इस इकाई में सोलर पॉलिशर और आधुनिक आटा चक्की लगाई गई है। आज यह मिल आसपास के दर्जनों गाँवों के किसानों के लिए धान कुटाई, चावल पॉलिशिंग और गेहूँ पिसाई का एक प्रमुख व भरोसेमंद केंद्र बन चुकी है।

*​सफलता का बहुआयामी मॉडल* 

       राईस मिल के संचालन से क्षेत्र के 4 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। धान प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले कोंडा को तेल निर्माण उद्योग हेतु और भूसे को ईंट निर्माण के लिए बेचा जाता है। इससे मिलने वाली अतिरिक्त आय से मिल के संचालन व्यय का कुशलतापूर्वक प्रबंधन हो जाता है। मिल संचालन से तुलेन्द्री को वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 2.40 लाख रूपए का शुद्ध लाभ हो रहा है। वे बैंक ऋण की बड़ी राशि का नियमित भुगतान कर चुकी हैं तथा योजना के तहत 35 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान का लाभ भी प्राप्त कर रही हैं।

​     ​शुरुआत में मशीनों के संचालन का अनुभव न होने के बावजूद तुलेन्द्री ने अपनी सीखने की ललक और दृढ़ इच्छाशक्ति से व्यवसाय में दक्षता हासिल की। अपनी इस सफलता का श्रेय वे छत्तीसगढ़ शासन, भारत सरकार, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र तथा यूनियन बैंक को देती हैं। श्रीमती तुलेन्द्री ठाकुर कहती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और शासकीय योजनाओं का सही लाभ मिले, तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बनने का सपना साकार कर सकती है।

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