संकट में काम आयीं पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं: मोदी

Report by manisha yadav

नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सरकार ने पिछले 10-12 साल में ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र के साथ जो सुधार किये और जो नीतियां अपनायीं, उसी का परिणाम है कि कोरोना महामारी तथा पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि पिछले 10-12 साल में दुनिया में कई संकट आये। कोरोना ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया। उसके बाद यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्ध आये। हर जगह तनाव का माहौल था। ‘भविष्य वक्ताओं’ ने तो कहा कि वैक्सीन नहीं मिलेगी, कोविड में लोग बचेंगे नहीं, पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी। उन्होंने देश को डराने का काम किया, इसी में उन्हें आनंद आता है।

उन्होंने कहा, “देश ने देख लिया कि पिछले 10-12 साल की सुविचारित योजनाएं रंग ला रही हैं। ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र को लेकर जीते हुए भारत ने पिछले 10-12 साल में जो तैयारियां की थीं, एक के बाद एक जो कदम उठाये थे, …वे सभी चीजें काम आ गयीं। आज देश में पेट्रोल भी है, डीजल भी है, गैस भी है, यूरिया भी है। हम अपनी ताकत के बल पर चल रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के इस संकट का प्रभाव हर किसी पर हुआ है और भारत भी अछूता नहीं है। एक बोरी यूरिया की कीमत दुनिया में तीन हजार रुपये पर पहुंच गयी है, लेकिन देश में किसानों पर वह बोझ न डालकर आज भी उन्हें सिर्फ 300 रुपये में यूरिया की बोरी दी जा रही है। डीएपी की कीमत दुनिया में पांच हजार रुपये है जो देश के किसानों को 1,350 रुपये में दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि संसाधन के कारण देश रुकता नहीं है, कई बार इसका कारण सोच होती है। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ऐसी सोच के कारण समुद्री तट का हमारा हिस्सा 90 प्रतिशत हिस्सा ‘नो गो एरिया’ घोषित कर दिया गया था। यह सोच का दारिद्र था। उनकी सरकार ने उसे ‘गो अहेड एरिया’ के रूप में खोल दिया है। हम समुद्र के अंदर भी नये-नये भंडार खोजने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा, “ बीते वर्षों में सरकार का ध्येय रहा है कि हमें अब दूसरे देशों पर निर्भर रह कर नहीं जीना है, हमें आत्मनिर्भर होना चाहिये। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, लेकिन उससे हमारा सामार्थ्य नहीं बनता है। हमें भी अपनी क्षमता बढ़ानी है। “मेक इन इंडिया”, “वोकल फॉर लोकल” जैसे क्षेत्रों में आज हर भारतीय का मन जुड़ चुका है।” सेमीकंडक्टर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले सेमीकंडक्टर की बातें होती थीं, लेकिन हम उसमें आगे नहीं बढ़ सके।

आज की दुनिया में हर इलेक्ट्रॉनिक, मेडिकल और परिवहन उपकरण में चिप जरूरी है। देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो गये हैं। वहां से निर्यात भी शुरू हो चुका है। आने वाले सात-आठ साल में और पांच-छह सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पूरी सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी क्रिटिकल मिनरल पर आधारित हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने कई देशों के साथ इसके लिए समझौते किये हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *