आपदाओं से निपटने के लिए ब्रिक्स में पूर्व चेतावनी प्रणाली और मजबूत आपूर्ति शृंखला पर मोदी का जोर

नयी दिल्ली, (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच पूर्व चेतावनी प्रणाली और मजबूत आपूर्ति शृंखला पर जोर देते हुए कहा है कि परस्पर जुड़े विश्व में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
श्री मोदी ने यहां भारत मंडपम में 8वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन रविवार को ” लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता : समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना” सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और इसका व्यापक असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए तकनीक को सभी के लिए सुलभ और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं ने दिखाया है कि आपस में जुड़े विश्व में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के प्रयासों को लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार स्तंभों पर केंद्रित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। इसी दिशा में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली पर सहमति बनी है। आपदा प्रबंधन के लिए पूर्व चेतावनी आंकड़ा एकीकरण दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। वहीं, ब्रिक्स रसद आपूर्ति शृंखला सहयोग ढांचे के जरिए आपूर्ति शृंखला को अधिक भरोसेमंद और लचीला बनाने पर जोर दिया गया है।
नवाचार के क्षेत्र में ब्रिक्स उद्यम संवर्धन नेटवर्क के जरिए नए उद्यमों और उद्यम संवर्धन केंद्रों को आपस में जोड़ने की पहल की गई है। नए और बड़े स्तर पर लागू किए जाने वाले समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स नए उद्यम नवाचार कोष का प्रस्ताव रखा गया है। ब्रिक्स डिजिटल कृषि नेटवर्क के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए तकनीक को सभी के लिए सुलभ और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। ब्रिक्स संपर्क पहल के जरिए कौशल, रोजगार क्षमता, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया गया है। छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए ब्रिक्स सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सहयोग पोर्टल की पहल की गई है।

शहरों के बीच बेहतर तौर-तरीकों को साझा करने के लिए ब्रिक्स शहरी आवागमन केंद्र की स्थापना की गई है। स्थिरता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है और विकास तथा पर्यावरण को एक-दूसरे का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक माना गया है।

उन्होंने कहा कि स्मार्ट विद्युत ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र बनाया गया है। यह स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को अधिक भरोसेमंद, प्रभावी और सुलभ बनाने में मदद करेगा। कृषि-पारिस्थितिकी और कृषि के उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर काम किया गया है। समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन के लिए तैयार सिद्धांतों में स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान को जलवायु कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स के जरिए विकसित समाधान केवल ब्रिक्स देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक दक्षिण की जरूरतों के अनुरूप अपनाने योग्य और सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है और उनके लिए नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर समाधान तैयार किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की ताकत उसकी विविधता और सहयोग में है। उन्होंने कहा,” हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।”

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