Report by manisha yadav
गरियाबंद। जिले के अमलीपदर इलाके में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उरमाल गांव के कश्यपारा में कथित तौर पर पिछले करीब पांच वर्षों से एक अवैध क्लिनिक संचालित होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना मान्य चिकित्सकीय डिग्री और निर्धारित अनुमति के यहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में सस्ता इलाज मिलने की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग इस क्लिनिक का रुख करते हैं। स्थानीय स्तर पर संचालक को ‘उड़िया डॉक्टर’ के नाम से जाना जाता है। दावा किया जा रहा है कि यहां सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि ओडिशा के दूर-दराज इलाकों से भी मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं।
‘इलाज करने से कोई नहीं रोक सकता’ का दावा
जानकारी के मुताबिक, उरमाल गांव में एक छोटे से कमरे में यह क्लिनिक लंबे समय से चल रहा है। क्लिनिक के संचालन और वहां मरीजों के इलाज को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
क्लिनिक संचालक बे लोचन प्रधान खुद को पैथोलॉजिस्ट बताते हैं। उनका कहना है कि मरीज खुद इंजेक्शन लेकर आते हैं और वह उन्हें लगा देते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास इलाज से संबंधित अनुमति है और इसे हर किसी को दिखाना जरूरी नहीं है।
कथित डॉक्टर का यह भी कहना है कि इलाके के बीएमओ, सीएमओ और कलेक्टर तक यहां आ चुके हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का उन पर भरोसा होने के कारण उन्हें इलाज करने से कोई नहीं रोक सकता।
हालांकि, इन दावों और उनके पास मौजूद कथित अनुमति की वैधता की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
हड्डी और जोड़ों के दर्द के इलाज का दावा
स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस क्लिनिक में हड्डियों और जोड़ों से संबंधित समस्याओं का इलाज करने का दावा किया जाता है। आरोप है कि अलग-अलग बीमारियों के लिए मरीजों को इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं।
इलाज, दवा और इंजेक्शन के नाम पर मरीजों से कथित तौर पर 200 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक शुल्क लिया जाता है।
क्लिनिक में मरीजों की भीड़ को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा है। दावा है कि कई बार यहां सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की तुलना में भी अधिक मरीज पहुंचते हैं।
ओडिशा से भी पहुंचते हैं मरीज
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित क्लिनिक में सिर्फ छत्तीसगढ़ के मरीज ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के विभिन्न इलाकों से भी लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय होने के कारण इस क्लिनिक पर मरीजों का भरोसा बना हुआ बताया जा रहा है। हालांकि, अब तक इलाज से संबंधित कोई लिखित शिकायत प्रशासन के पास नहीं पहुंचने की बात स्वास्थ्य विभाग की ओर से कही गई है।
2019 में हो चुकी है कार्रवाई
इस मामले का इतिहास भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में तत्कालीन गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े को मिली शिकायत के बाद क्लिनिक पर कार्रवाई की गई थी।
बताया जाता है कि उस समय कलेक्टर की मौजूदगी में संबंधित क्लिनिक पर छापेमारी की गई थी। उस वक्त क्लिनिक उरमाल की बस्ती के बीच संचालित हो रहा था और कार्रवाई के दौरान उसे सील कर दिया गया था।
लेकिन आरोप है कि छापेमारी के करीब डेढ़ साल बाद क्लिनिक ने दोबारा अपना संचालन शुरू कर दिया। बाद में इसे उरमाल के कश्यपारा में संचालित किए जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से कटक जिले का रहने वाला बे लोचन अब उरमाल का वोटर और आधार कार्ड भी बनवा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
पांच वर्षों से कथित रूप से क्लिनिक संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अगर क्लिनिक के पास आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन और अनुमति नहीं है, तो इतने लंबे समय तक इसके संचालन की जानकारी संबंधित विभागों तक क्यों नहीं पहुंची—यह जांच का विषय है।
वहीं दूसरी ओर, केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। क्लिनिक की वैधता, संचालक की योग्यता और मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सेवाओं की वास्तविक स्थिति की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी जरूरी है।
शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई: BMO
मैनपुर बीएमओ गजेंद्र ध्रुव ने मामले में कहा कि उन्हें अब तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही है।
बीएमओ के अनुसार, यदि जांच में क्लिनिक का संचालन अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच के इन बिंदुओं पर रहेगी नजर
- क्या क्लिनिक के संचालन के लिए वैध अनुमति है?
- संचालक के पास मरीजों के इलाज की आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन है या नहीं?
- मरीजों को इंजेक्शन और दवाएं देने के लिए क्या निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है?
- वर्ष 2019 में सील किए गए क्लिनिक के दोबारा संचालन की जानकारी विभाग को थी या नहीं?
- स्वास्थ्य विभाग की टीम मामले में कब जांच करती है और क्या कार्रवाई होती है?
ग्रामीण क्षेत्र में किसी भी तरह की चिकित्सा सेवा सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। ऐसे में क्लिनिक की वैधता और इलाज की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
