
जगदलपुर। बस्तर में मूसलाधार बारिश और उफनती नदियों ने चारों तरफ विकराल रूप धारण कर रखा है। बाढ़ के इस खौफनाक मंजर के बीच इंसान और बेजुबानों के बीच अटूट रिश्ते और उससे उपजी एक दिल दहला देने वाली दास्तान सामने आई है। जिला मुख्यालय जगदलपुर से करीब उन्नीस किलोमीटर दूर नगरनार क्षेत्र का नदी बोड़ना गांव जब चारों तरफ से पानी से घिर गया, तब 55 वर्षीय ग्रामीण रेनू कश्यप के सामने अपनी जिंदगी और अपने प्यारे मवेशियों में से किसी एक को चुनने की कठिन घड़ी थी। बेजुबानों के प्रति गहरे लगाव ने अंततः उनकी जान ले ली।शनिवार को जब बाढ़ का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा, तो प्रशासन की आपदा राहत और रेस्क्यू टीम नाव लेकर नदी बोड़ना गांव पहुंची। राहत दल ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने की कवायद शुरू की। टीम जब रेनू कश्यप के घर पहुंची और उन्हें तुरंत नाव में सवार होने को कहा, तो रेनू ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि खूंटे से बंधे उनके गाय-बैल पानी में तड़प रहे हैं, वह उन्हें इस हाल में बेसहारा छोड़कर कभी नहीं जाएंगे। उन्होंने निस्वार्थ भाव से पहले गांव के अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने का अनुरोध किया।
जब तक लौटी मदद, तब तक हो चुकी थी अनहोनी
प्रशासनिक टीम ने मानवीयता का परिचय देते हुए पहले अन्य ग्रामीणों को राहत शिविर पहुंचाया। इसके बाद टीम रेनू को सुरक्षित लाने के लिए दोबारा नाव लेकर पानी के तेज बहाव के बीच उनके घर की ओर रवाना हुई। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। बाढ़ के पानी के साथ घर के भीतर दाखिल हुए एक जहरीले सांप ने रेनू को डस लिया था। जब टीम पहुंची, तो रेनू अचेत अवस्था में मिले। उन्हें फौरन बोट से निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
प्रशासन की अपील: मवेशियों के मोह में न गंवाएं जान
नगरनार पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। इस दुखद हादसे ने बाढ़ के एक और छिपे हुए जानलेवा खतरे को उजागर किया है। जलभराव होने पर जहरीले जंतु सूखे स्थानों की तलाश में सीधे घरों में घुस रहे हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से भावुक अपील की है कि बाढ़ आपदा के समय मवेशियों के मोह में घरों में न रुकें और रेस्क्यू दल का सहयोग कर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें।
[rasi mandaal]
