बस्तर में बदल रहा सुरक्षा का मोर्चा, केंद्रीय बलों की जगह लेंगे 1,588 नए फाइटर्स, दो नवंबर से आवेदन

बस्तर में बदल रहा सुरक्षा का मोर्चा, केंद्रीय बलों की जगह लेंगे 1,588 नए फाइटर्स, दो नवंबर से आवेदन

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था के मोर्चे पर एक बदलाव देखने को मिल रहा है। माओवादी हिंसा से पूरी तरह मुक्त हो रहे अंदरूनी इलाकों में अब केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को चरणबद्ध तरीके से घटाया जा रहा है और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस को सौंपी जा रही है।इस रणनीति के तहत बस्तर फाइटर्स और जिला रिजर्व गार्ड की भूमिका को विस्तार दिया जा रहा है। संभाग के सातों जिलों में बस्तर फाइटर्स के कुल 1,588 नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया दो नवंबर से शुरू होने जा रही है। स्थानीय युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने से अंदरूनी क्षेत्रों में पुलिस की स्थायी मौजूदगी और नियमित पुलिसिंग को अभूतपूर्व मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा कैंपों का सेवा केंद्रों में हो रहा कायापलट

अंदरूनी क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सुरक्षा कैंपों की भूमिका में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नेतानार में शुरू किए गए ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ की तर्ज पर अब पहले चरण में लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को नागरिक सुविधाओं के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचा रहे केंद्र

इन केंद्रों के माध्यम से सुदूर ग्रामीण अंचलों के नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा के रेंगानार, मेटापाल, जारम और बड़ेगुडरा कैंपों के साथ-साथ नारायणपुर के भटपाल और कुरुषनार कैंपों से भी केंद्रीय बलों की वापसी शुरू हो चुकी है, जिनमें से कई भवनों को अब छात्रवासों में भी तब्दील कर दिया गया है।

स्थानीय युवाओं की भर्ती और व्यापक प्रशिक्षण योजना

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक बद्रीनारायण मीणा के अनुसार राज्य शासन की स्वीकृति मिलने के बाद संभाग के सभी सात जिलों में यह विशेष भर्ती प्रक्रिया आरंभ की जा रही है। आने वाले आगामी चरणों में चार हजार से अधिक डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के जवानों को थानों में तैनात करने की ठोस योजना बनाई गई है।

बस्तर में सफल है स्थानीय बलों का फार्मूला

बस्तर के पूर्व आइजी सुंदरराज पी के अनुसार, स्थानीय जवान जंगलों, पहाड़ी रास्तों और अंदरूनी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित होते हैं। स्थानीय बोली-भाषा और सामाजिक ताने-बाने की समझ से उन्हें ग्रामीणों से संवाद और सूचनाएं जुटाने में मदद मिलती है। इससे पुलिस और ग्रामीणों के बीच संपर्क मजबूत हो सकता है।

ऐसे कर सकते हैं आवेदन

भर्ती के लिए दो नवंबर से 12 दिसंबर 2026 शाम पांच बजे तक आवेदन जमा किए जा सकेंगे। अभ्यर्थी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक या एसडीओपी कार्यालय में आवेदन दे सकते हैं। पंजीकृत डाक से आवेदन भेजने की सुविधा भी होगी। भर्ती राज्य गृह विभाग और पुलिस विभाग की 31 अगस्त 2026 की अधिसूचना तथा बस्तर फाइटर्स आरक्षक सेवा भर्ती नियम 2026 के तहत होगी। अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनारक्षित और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए नियमानुसार आरक्षण लागू रहेगा।[rashi mandal]

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