Report by manisha yadav
रायपुर। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन ने दूरस्थ अंचलों में लोगों का जीवन बदल दिया है। मिशन के तहत हर घर में नल से जल पहुंचने से पूरे परिवार के लिए रोज पानी के इंतजाम में घंटों उलझे रहने वाली महिलाएं अब राहत की सांस ले रही हैं। जल जीवन मिशन ने रोज-रोज इस काम में लगने वाले श्रम औऱ परेशानियों से महिलाओं को निजात दिला दी है। घर पर ही पानी मिलने से अब महिलाएं अपने आजीविका संबंधी कार्यों, बच्चों और परिवार को पर्याप्त समय दे पा रही हैं।
गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ ग्राम पंचायत के बसाहट महेन्द्रगढ़ में जल जीवन मिशन के अंतर्गत सोलर आधारित पेयजल योजना संचालित की जा रही है। मुख्य मार्ग से इस गांव तक पहुंचने के लिए दो किमी कच्ची सड़क और जंगल से गुजरना पड़ता है। मिशन के तहत यहां हर घर में नल से प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति को 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध उपलब्ध कराया जा रहा है। बसाहट के सभी घरों में नल कनेक्शन प्रदान कर हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जा रहा है।
जीविकोपार्जन के लिए खेती और मजदूरी पर आश्रित महेंद्रगढ़ के लोग पहले पानी के लिए गांव में स्थापित दो हैंडपंपों, तीन कुंओं और बस्ती से 1-2 किमी दूर स्थित एक छोटे से तालाब पर निर्भर थे। मुख्यतः वर्षा जल पर निर्भरता के कारण साल के 4–5 महीने पानी की गंभीर समस्या होती थी। गांव की दूरपत बाई बताती हैं कि पहले कुएं और तालाब से पानी लेने में बहुत कठिनाई होती थी। बारिश के दिनों में पानी गंदा हो जाता था, जिससे खाना बनाना और बर्तन धोना मुश्किल होता था। पेट की तकलीफ भी होती थी और खाना स्वादहीन लगता था। अब नल लग जाने से पानी लेने के लिए उन्हें दूर नहीं जाना पड़ता। साफ-सुथरे पानी से खाना बनाना, बर्तन और कपड़े साफ करना आसान हो गया है। स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है।
गांव की बुजुर्ग दासो बाई स्वच्छ पेयजल मिलने से अत्यंत प्रसन्न हैं। वह बताती हैं कि नल लग जाने के बाद घर के कामों के लिए बहुत समय मिलता है। पहले महिलाओं और बच्चों को रोज हैंडपंप या कुएं पर जाकर पानी लाना पड़ता था, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित होते थे। अब सब आराम हो गया है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अब प्रभावित नहीं हो रही है। पहले पानी के इंतजाम के लिए घर की महिलाओं के साथ बच्चों को भी जूझना पड़ता था। नल जल योजना से पर्याप्त पानी की आपूर्ति से अब घर में साग-सब्जी भी उगा रहे हैं।
