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5 करोड़ के फर्जी लोन घोटाले का पर्दाफाश, EOW-ACB ने पेश किया चालान, दो आरोपी घेरे में

बिलासपुर में 5 करोड़ के फर्जी लोन घोटाले का पर्दाफाश, EOW-ACB ने पेश किया चालान, दो आरोपी घेरे में

 बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में वित्तीय अनियमितताओं और बैंक धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो EOW-ACB, रायपुर ने 5 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लोन घोटाले के मामले में अपनी विवेचना पूरी कर ली है।EOW-ACB ने 30 अक्टूबर 2026 को बिलासपुर के माननीय विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत कर दिया है। यह बहुचर्चित मामला बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर बिलासपुर शाखा से जुड़ा है, जिसमें बैंक को कुल

इन आरोपियों के विरुद्ध प्रस्तुत हुआ चालान

प्रकरण में निम्नलिखित दो मुख्य आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 12 एवं 13(2) के तहत चालान पेश किया गया है:

विश्वजीत भौमिक (पिता: दिलीप कुमार भौमिक, आयु 56 वर्ष, निवासी- विवेकानंद नगर, मोपका, बिलासपुर)।

राहुल कुमार सिन्हा पिता: स्व. मुरारी मोहन सिन्हा, आयु 45 वर्ष, तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा, राजकिशोर नगर, बिलासपुर।

आरोपी राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा की गढ़सीसा शाखा, जिला कच्छ, गुजरात में वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में पदस्थ हैं।

कैसे अंजाम दिया गया पूरा घोटाला? (विवेचना के मुख्य खुलासे)

दस्तावेजों का दुरुपयोग: मुख्य आरोपी विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा बिलासपुर स्थित ‘उड़ान माइक्रो फाइनेंस’ का कार्यालय संचालित करता था। वह ऋण दिलाने के नाम पर भोले-भाले लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी दस्तावेज, मूल संपत्ति के दस्तावेज और कोरे चेक पर हस्ताक्षर ले लेता था।

फर्जी फर्मों का सृजन: इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसने लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्में खड़ी कर दीं और कुछ फर्मों में अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर दर्शा दिया। जांच में तीन फर्मों के दुकान व स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जबकि सात फर्मों के जीएसटी रिटर्न उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से दाखिल किए गए थे।

बैंक प्रबंधक की मिलीभगत: तत्कालीन शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने 20 मार्च 2018 से 03 मई 2019 के बीच बैंक नियमों और परिपत्रों को ताक पर रखकर 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन स्वीकृत कर दिए। उन्होंने ऋण लेने वालों से असंबंधित व्यक्तियों की संपत्तियां बंधक के रूप में स्वीकार कीं और निरीक्षण रिपोर्ट में फर्जी पते व व्यवसाय दर्शाए।

फंड की हेराफेरी और NSIC से भुगतान: ऋण की राशि का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में न करके अन्य खातों में ट्रांसफर कर निकाली गई। इस पूरे घोटाले का अंतिम लाभार्थी विश्वजीत भौमिक पाया गया। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के माध्यम से रकम भौमिक की खुद की फर्म ‘ए.बी. फास्टनर्स’ तक पहुँचाई गई और कूटरचित बिलों के आधार पर भुगतान प्राप्त किया गया।

5,04,15,000 रुपये की भारी-भरकम आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी।EOW-ACB ने 30 अक्टूबर 2026 को बिलासपुर के माननीय विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत कर दिया है। यह बहुचर्चित मामला बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर बिलासपुर शाखा से जुड़ा है, जिसमें बैंक को कुल 5,04,15,000 रुपये की भारी-भरकम आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी।[rashi mandal]

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