Report by manisha yadav
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, वर्षा, अधिक आर्द्रता एवं मध्यम तापमान के कारण जिले में सब्जी फसलों पर विभिन्न कीटों के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए महंत बिसाहू दास उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ ने किसानों को समय रहते समन्वित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। महाविद्यालय के अधिष्ठाता के अनुसार वर्तमान मौसम में टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी तथा लौकी वर्गीय सब्जियों में सफेद मक्खी, माहू, जासिड, फल एवं तना छेदक तथा लाल कद्दू बीटल जैसे कीटों के प्रकोप के लिए अनुकूल है। किसानों को सप्ताह में कम से कम दो बार फसलों का निरीक्षण कर प्रारंभिक अवस्था में ही कीटों की पहचान एवं नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए।
विशेषज्ञों ने सफेद मक्खी, माहू एवं जासिड की रोकथाम के लिए प्रति एकड़ 15 से 20 पीले चिपचिपे ट्रैप तथा फल एवं तना छेदक की निगरानी के लिए 10 से 12 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी है। संक्रमित फल, पत्तियों एवं टहनियों को एकत्र कर नष्ट करने तथा खेत को खरपतवार एवं जलभराव से मुक्त रखने कहा गया है। जैविक नियंत्रण के लिए 1500 पीपीएम नीम तेल का 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से अथवा अजादिरैक्टिन का उपयोग करने की सलाह दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में थायमेथोक्साम, इमिडाक्लोप्रिड, एमामेक्टिन बेंजोएट, क्लोरान्ट्रानिलीप्रोल अथवा स्पिनोसैड जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है।
कीटनाशक छिड़काव वर्षा रुकने के लगभग 24 घंटे बाद साफ मौसम में करने तथा दवा के साथ स्टिकर का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है। विशेषज्ञ ने किसानों से एक ही कीटनाशक का बार-बार उपयोग नहीं करने तथा विभिन्न समूहों की अनुशंसित दवाओं का बारी-बारी से प्रयोग करने और समन्वित कीट प्रबंधन अपनाकर फसल को सुरक्षित रखते हुए उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में वृद्धि करने सलाह दिया गया है।
