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छत्तीसगढ़ में बस किराया बढ़ने पर सरकार का पक्ष, डिप्टी CM अरुण साव बोले – ऑपरेटर्स की मांग पर लिया फैसला

Report by manisha yadav

रायपुर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के किराए में बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बस किराया बढ़ाए जाने के फैसले का कारण बताते हुए कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हुई है और ट्रांसपोर्टर भी लगातार किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने बस किराए में मामूली वृद्धि की है। हालांकि, नई किराया दरों को लेकर यात्रियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की भी चर्चा हो रही है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बस किराया बढ़ोतरी के संबंध में कहा, “पेट्रोलियम पदार्थों में बढ़ोतरी हुई है, ट्रांसपोर्टर भी लगातार वृद्धि की मांग कर रहे थे।

इसलिए किराए में नॉमिनल वृद्धि की गई है।” उनके इस बयान के बाद बस किराए में हुई वास्तविक बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग ने यात्री बसों की नई किराया दरें निर्धारित की हैं। 8 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के तहत साधारण, डीलक्स, वातानुकूलित, स्लीपर और अन्य श्रेणियों की बसों के लिए नई दरें तय की गई हैं। नई व्यवस्था के तहत यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक किराया देना होगा। साधारण बसों के किराए को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रति किलोमीटर दर 1.25 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये की गई है। इस आधार पर किराए में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि होती है। वहीं, साधारण बसों में पहले पांच किलोमीटर का किराया 10 रुपये निर्धारित किया गया है। ऐसे में अलग-अलग दूरी के लिए किराए में बढ़ोतरी का असर भी अलग हो सकता है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किराया वृद्धि को मामूली बताया है। दूसरी ओर, बसों से नियमित यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से रोजाना बस से आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों के यात्रा खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने के लिए यात्री बसों पर निर्भर हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आवागमन में भी बस सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में किराए में किसी भी प्रकार की वृद्धि का सीधा असर नियमित यात्रियों के मासिक बजट पर पड़ता है।

सरकार की ओर से किराया वृद्धि के पीछे परिवहन व्यवसाय से जुड़ी लागत और ट्रांसपोर्टरों की लगातार मांग को प्रमुख कारण बताया गया है। उपमुख्यमंत्री के बयान के अनुसार, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते परिवहन संचालक किराया संशोधन की मांग कर रहे थे। वहीं, नई किराया व्यवस्था में साधारण बसों के अलावा डीलक्स, वातानुकूलित और स्लीपर बसों के लिए भी दरें निर्धारित की गई हैं। इससे अलग-अलग श्रेणियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के किराए में बदलाव होगा। बस किराए में बढ़ोतरी के बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ सरकार इस फैसले को परिवहन संचालकों की मांग और बढ़ती लागत से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ किराए में हुई बढ़ोतरी का असर यात्रियों के खर्च पर पड़ने वाला है। फिलहाल नई किराया दरें जारी होने के बाद बस यात्रियों के लिए सफर महंगा हो गया है। सरकार की ओर से इसे मामूली वृद्धि बताया गया है, जबकि उपलब्ध दरों के अनुसार साधारण बसों का प्रति किलोमीटर किराया लगभग 40 प्रतिशत बढ़ा है।

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