Today

छत्तीसगढ़ के आवासीय क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, गैस गोदाम, कबाड़खाना ट्रांसपोर्ट टर्मिनल प्रतिबंधित

 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने चार दशक पुराने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में बदलाव कर दिया है। सरकार ने दावा और आपत्ति की प्रक्रिया पूरी करने के बाद संशोधित नियमों को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। पुराने नियमों की जटिलताओं को समाप्त करते हुए अब भूमि उपयोग को अत्यंत लचीला बनाया गया है।पहले व्यवस्था यह थी कि किसी भी गतिविधि को शुरू करने के लिए उसका नियमों की अनुमति सूची में शामिल होना अनिवार्य होता था। नए संशोधन के बाद अब केवल उन्हीं गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिन्हें प्रतिबंधित सूची में दर्ज किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर कोई गतिविधि निषेध सूची में नहीं है, तो उसे बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के संचालित किया जा सकेगा।सात श्रेणियों में भूमि का नया वर्गीकरण

नए प्रावधानों के अंतर्गत राज्य की संपूर्ण भूमि को सात मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि भूमि शामिल हैं। प्रत्येक वर्ग के लिए प्रतिबंधित गतिविधियों की एक स्वतंत्र और स्पष्ट सूची बनाई गई है। आवासीय क्षेत्रों में लाल, नारंगी और हरे वर्ग के प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, गैस गोदाम, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े ट्रांसपोर्ट टर्मिनल, तेल डिपो, डेयरी, मत्स्य पालन और खनन जैसी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।

वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के नए मानक

वाणिज्यिक क्षेत्रों के भीतर खतरनाक रसायनों का भंडारण, विस्फोटक सामग्री, भारी उद्योग, वधशाला, पशुपालन, श्मशान, कब्रिस्तान और खनन कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्रों में सामान्य आवासीय बस्तियां बसाने, स्कूल खोलने, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल और गैस गोदाम जैसी गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। अन्य श्रेणियों के लिए भी इसी प्रकार की स्पष्ट सीमाएं तय की गई हैं। इस नीतिगत बदलाव से प्रदेश में नए उद्योगों, स्टार्टअप्स और आधुनिक सेवाओं के विकास के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

[rashi mandal]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *