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27 लाख रुपये से बनी सिर्फ एक दीवार; रीवा में आरईएस के 5 इंजीनियर और ठेकेदार पर FIR

27 लाख रुपये से बनी सिर्फ एक दीवार; रीवा में आरईएस के 5 इंजीनियर और ठेकेदार पर FIR

 रीवा। निराश्रित गोवंश को सहारा देने के लिए बनी योजना ही भ्रष्टाचार का चारा बन गई। रीवा जिले में जीराम जी से बनने वाली गोशाला में 20 लाख से अधिक के फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग-2 के 5 तत्कालीन अधिकारियों और एक चहेते ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

कागज पर पूरी गोशाला, धरातल पर सिर्फ 80 फीट की दीवार

मामला नगर परिषद डभौरा के डभौरा यूनिट-3 का है। यहां जीराम जी योजना के तहत 37.85 लाख रुपये से गोशाला, बछड़ा शेड, भूसा गोदाम, बीमार गाय शेड, नलकूप, 6000 लीटर पानी की टंकी और बाउंड्रीवॉल समेत समतलीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। काम आरईएस संभाग क्रमांक-2 रीवा को सौंपा गया था।

भौतिक सत्यापन कराया तो होश उड़ गए

शिकायत पर जब ईओडब्ल्यू ने भौतिक सत्यापन कराया तो होश उड़ गए। मौके पर गोशाला, शेड, नलकूप, पानी टंकी का नामोनिशान तक नहीं मिला। सिर्फ एक 80 x 25 फीट की अर्द्धनिर्मित बाउंड्रीवॉल और एक अधूरा भवन खड़ा मिला, जो पूरी तरह अनुपयोगी है।

बिना ओपन टेंडर के साठ-गांठ कर ठेका दिया

ईओडब्ल्यू ने बताया कि अधिकारियों ने किस तरह सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया है। बिना ओपन टेंडर के साठ-गांठ कर चहेती फर्म मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा (छतरपुर) को ठेका दे दिया गया।

एक ही काम के लिए दो अलग निविदाएं

पारदर्शी प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए एक ही काम के लिए दो अलग-अलग तारीखों 03.12.2020 और 31.12.2020 की फर्जी एवं कूटरचित संक्षिप्त निविदाएं तैयार की गईं। इस निविदा के लिए न तो सप्लायर ने कोई निविदा शुल्क जमा किया और न ही अमानत राशि ।

9 सामग्रियों का अधूरा दर पत्रक दिया

नियमों के मुताबिक 28 सामग्रियों का कोटेशन मांगा गया था, लेकिन फर्म ने केवल 9 सामग्रियों का अधूरा दर पत्रक दिया। फिर भी फर्जी तुलनात्मक पत्रक बनाकर उसे एल-1 (न्यूनतम दर) घोषित कर कार्यादेश दे दिया गया।

बिना काम निकाली राशि से शासन को भारी आर्थिक क्षति

सप्लायर और अधिकारियों ने मिलकर जीराम जी पोर्टल पर कुल 27,38,578.22 रुपये के फर्जी बिल प्रस्तुत किए, जिसमें से 20,22,020 रुपये का भुगतान भी आहरित कर लिया गया। इस तरह बिना काम कराए शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।

इन छह पर दर्ज हुआ अपराध

ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद अपराध प्रमाणित पाते हुए प्रकरण पंजीबद्ध किया है। राजेन्द्र सिंह धुर्वे तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग-1 एवं प्रभारी संभाग-2, डी.एस. आर्मो तत्कालीन कार्यपालन यंत्री संभाग-2 रीवा, हिमांशु तिवारी तत्कालीन कार्यपालन यंत्री सीधी, जगदीश सिंह राजपूत तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी मऊगंज, लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 प्रभारी निविदा शाखा, दीनदयाल कुशवाहा प्रोप्राइटर फर्म आरोपी बनाए गए हैं।[rashi mandal]

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