
जानकारी के अनुसार, वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक पिकअप वाहन के जरिए अवैध रूप से खैर की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है। सूचना के बाद रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र का अमला सक्रिय हुआ और संभावित मार्ग पर निगरानी बढ़ाते हुए वाहनों की जांच शुरू की गई।
इसी दौरान UP64H 3452 नंबर की पिकअप को रोककर जांच की गई। वाहन में पहली नजर में बैंगन की बोरियां लदी हुई दिखाई दीं। संदेह होने पर वनकर्मियों ने बोरियों को हटाकर वाहन की तलाशी ली तो उनके नीचे बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी छिपाकर रखी मिली। इसके बाद वन अमले ने तत्काल वाहन को कब्जे में लेकर लकड़ी जब्त कर ली।
वन विभाग के अनुसार, बरामद खैर लकड़ी की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। कार्रवाई के दौरान वाहन चालक सहित तस्करी में शामिल लोग अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। वन विभाग की टीम अब फरार आरोपियों की पहचान करने के साथ ही तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
वन विभाग द्वारा मामले में वन अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि खैर की लकड़ी को जंगल के किस क्षेत्र से काटा गया था और इसे कहां ले जाया जा रहा था।
रेंजर से जानकारी लेने का प्रयास, नहीं मिला जवाब,
इस मामले में रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के रेंजर एली मिंज से जानकारी लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फोन रिसीव नहीं होने के कारण जब्त की गई लकड़ी की मात्रा, अनुमानित कीमत और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी।
बैंगन जैसी सब्जी की आड़ में खैर की लकड़ी का परिवहन किए जाने की घटना ने वन सुरक्षा और अवैध लकड़ी तस्करी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि इस तरह की तस्करी कब से चल रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। वन विभाग की जांच आगे बढ़ने के बाद तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क के सामने आने की उम्मीद है।
