Report by manisha yadav
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में NDPS केस की जांच के दौरान निर्धारित प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करना पुलिस अधिकारियों को भारी पड़ गया। डोंगरीपाली थाने में दर्ज गांजा तस्करी के मामले की केस डायरी की समीक्षा में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद आईजी रामगोपाल गर्ग ने थाना प्रभारी और विवेचक पर कार्रवाई की है।
दोनों अधिकारियों पर 500-500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। वहीं, मामले की निगरानी कर रहे डीएसपी की भूमिका में भी गंभीर पर्यवेक्षकीय कमी पाए जाने पर आईजी ने नाराजगी जताई है।
केस डायरी की जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
डोंगरीपाली थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20-बी और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया था। केस डायरी की समीक्षा के दौरान सामने आया कि पुलिस ने रेंज कार्यालय के निर्धारित परिपत्र के अनुसार आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों के कथन दर्ज नहीं किए थे।
इस मामले में संबंधित थाना प्रभारी और विवेचक से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। उन्हें 18 जुलाई 2026 तक जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी रेंज कार्यालय को जवाब नहीं मिला।
पुलिस विभाग के आदेश में वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों का पालन नहीं करने को गंभीर लापरवाही, अवज्ञा और कदाचरण की श्रेणी में माना गया है।
थाना प्रभारी और विवेचक पर 500-500 रुपये का जुर्माना
कार्रवाई के तहत डोंगरीपाली थाना प्रभारी एएसआई भगवती कुर्रे को जिम्मेदार माना गया। उनके खिलाफ निर्धारित प्रारूप में कथन दर्ज नहीं कराने और रेंज कार्यालय के परिपत्र का पालन सुनिश्चित नहीं करने की बात सामने आई।
इसके अलावा विवेचक की गलती पर समय रहते ध्यान नहीं देने को भी उनकी लापरवाही माना गया। इसके चलते उन पर 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
इसी मामले में विवेचक एएसआई छोटेलाल सिदार पर भी 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। उन पर निर्धारित प्रारूप में कथन दर्ज नहीं करने और वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों का पालन नहीं करने की जिम्मेदारी तय की गई।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु
- थाना प्रभारी एएसआई भगवती कुर्रे पर ₹500 अर्थदंड।
- विवेचक एएसआई छोटेलाल सिदार पर ₹500 अर्थदंड।
- केस डायरी में निर्धारित प्रारूप का पालन नहीं हुआ।
- वरिष्ठ कार्यालय के परिपत्र की अनदेखी सामने आई।
- समय पर स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत नहीं किया गया।
- पर्यवेक्षण अधिकारी की भूमिका पर भी आईजी ने नाराजगी जताई।
DSP की पर्यवेक्षण भूमिका पर भी उठे सवाल
इस कार्रवाई में सिर्फ थाना प्रभारी और विवेचक ही नहीं, बल्कि मामले की निगरानी करने वाली अधिकारी की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।
आदेश के अनुसार डीएसपी सारंगढ़ संतोषी ग्रेस ने थाना स्तर पर वरिष्ठ कार्यालय के परिपत्र का पालन हो रहा है या नहीं, इस पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया। इसे गंभीर पर्यवेक्षकीय त्रुटि मानते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने उनके प्रति अप्रसन्नता व्यक्त की है।
यह कार्रवाई पुलिस जांच में सिर्फ नतीजे ही नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं के पालन और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है।
क्या था पूरा NDPS मामला?
यह कार्रवाई जिस मूल मामले से जुड़ी है, उसमें डोंगरीपाली पुलिस ने 8 मई 2026 को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर ग्राम बिरनीपाली बस स्टैंड के पास घेराबंदी की थी।
पुलिस के अनुसार, इस दौरान दो युवकों को पकड़ा गया। उनकी पहचान निखिल वर्मा (21) और साहिल खान (25) के रूप में हुई। दोनों बलौदाबाजार के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस ने तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद बैग से आठ पैकेट गांजा बरामद किया। इसका कुल वजन करीब 8 किलो और अनुमानित कीमत लगभग 80 हजार रुपये बताई गई।
पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए।
पूछताछ में सामने आया गांजा खरीदने का दावा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों युवकों ने गांजा जयंत नामक व्यक्ति से खरीदने की बात बताई थी। इसके आधार पर पुलिस ने मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20-बी और 29 के तहत कार्रवाई की।
अब इसी केस की विवेचना के दौरान सामने आई प्रक्रियात्मक कमियों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई हुई है।
पुलिस जांच में प्रक्रिया का पालन क्यों जरूरी?
NDPS जैसे गंभीर मामलों में जांच की प्रक्रिया का सही तरीके से पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। केस डायरी, बयान और जब्ती समेत सभी दस्तावेज निर्धारित नियमों के अनुसार तैयार किए जाने होते हैं।
किसी प्रक्रिया में कमी रहने पर अदालत में जांच की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना जांच अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
नोट: यह खबर पुलिस विभाग की कार्रवाई और उपलब्ध विवरणों पर आधारित है। आरोपों और मामले के अंतिम कानूनी निष्कर्ष का निर्धारण न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
