Report by manisha yadav
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने से हड़कंप मच गया है। जाजमऊ इलाके में साइबर पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे कथित नेटवर्क का पता चला, जो कॉल सेंटर की आड़ में ऑनलाइन ठगी का कारोबार चला रहा था। पुलिस जांच में करीब 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आने की बात कही गई है।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 65 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी के साथ मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर बनाते थे शिकार
पुलिस के मुताबिक, कथित साइबर ठग लोगों को निवेश के नाम पर अपने जाल में फंसाते थे। उन्हें कम समय में ज्यादा रिटर्न मिलने का लालच दिया जाता था। भरोसा बनने के बाद पीड़ितों से अलग-अलग माध्यमों से रकम जमा कराई जाती थी।
इसके बाद कथित तौर पर इस रकम को अलग-अलग बैंक खातों, कंपनियों और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी।
14 बैंकों में मिले 72 संदिग्ध खाते
जांच के दौरान पुलिस को कानपुर के 14 अलग-अलग बैंकों में 72 संदिग्ध खाते मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल कथित ठगी की रकम को जमा करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था।
अब इन सभी खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाली जा रही है। बैंकिंग रिकॉर्ड से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम कहां से आई और किन-किन खातों या लोगों तक पहुंची।
जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य
- करीब 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जांच।
- 14 बैंकों में 72 संदिग्ध बैंक खाते।
- निवेश के नाम पर लोगों को कथित तौर पर फंसाने का आरोप।
- रकम को कई खातों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए घुमाने की आशंका।
- कई राज्यों में नेटवर्क के लिंक मिलने की बात।
- NCRB पोर्टल पर करीब 86 शिकायतें मिलने का दावा।
18 राज्यों तक फैले नेटवर्क की आशंका
कानपुर में सामने आए इस मामले के तार कई राज्यों से जुड़ने की बात कही जा रही है। पुलिस जांच में दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत अलग-अलग राज्यों के लिंक सामने आए हैं।
यही वजह है कि पुलिस इस मामले को सिर्फ स्थानीय साइबर ठगी का मामला नहीं मान रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस कथित नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं।
NCRB पोर्टल पर मिलीं 86 शिकायतें
पुलिस जांच के दौरान NCRB पोर्टल पर इस नेटवर्क से जुड़ी करीब 86 शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। इन शिकायतों की जानकारी को भी मौजूदा जांच से जोड़ा जा रहा है।
पुलिस अब शिकायतकर्ताओं, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच कनेक्शन तलाश रही है। इससे कथित ठगी के वास्तविक दायरे और पीड़ितों की संख्या का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
65 लाख से ज्यादा कैश और डिजिटल सबूत बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 65 लाख 26 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक और कथित फर्जी GST व उद्यम प्रमाणपत्र भी जब्त किए गए हैं।
आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली हैं। पुलिस इन डिजिटल सबूतों को मामले की जांच में अहम मान रही है।
इन रिकॉर्ड्स के जरिए पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने और कथित लेन-देन की पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही है।
दो आरोपी गिरफ्तार, पांच अन्य की तलाश
साइबर पुलिस ने मामले में शाहजेब वारिस और सलमान को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों के नाम सामने आने की बात कही गई है।
पुलिस अब इतिशाम हुसैन, शाहवेज इलाही, मोहम्मद मुजम्मिल, इखलाख हुसैन और मोहम्मद आरिफ समेत अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।
बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की होगी गहन जांच
अब जांच का फोकस कथित साइबर फ्रॉड की पूरी मनी ट्रेल पर है। पुलिस बैंक खातों की गतिविधियों के साथ मोबाइल फोन, WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन में वास्तविक रूप से कितनी रकम साइबर ठगी से जुड़ी है और कितनी रकम दूसरे वित्तीय लेन-देन की हो सकती है।
पुलिस के सामने सबसे बड़े सवाल
- 5600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की वास्तविक प्रकृति क्या है?
- 72 बैंक खातों का संचालन कौन कर रहा था?
- कथित ठगी से कितने लोग प्रभावित हुए?
- नेटवर्क के तार कितने राज्यों तक जुड़े हैं?
- क्या इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कोई कनेक्शन है?
- बरामद मोबाइल और दस्तावेजों से कितने नए नाम सामने आएंगे?
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस बैंकिंग और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।
नोट: यह खबर पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
