
भोपाल : ग्वालियर के बाद भोपाल के एक बौद्ध मठ के पते पर बने 40 फर्जी पासपोर्ट बनवाने में भी इस नेटवर्क के प्रमुख रियाल चौधरी की भूमिका संदेह के घेरे में है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उसे गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। उसने बताया है कि एक पासपोर्ट बनवाने के लिए वह 25 हजार रुपये लेता था।दस्तावेजों में बताया गया बौद्ध अनुयायी
ग्वालियर के डबरा में फर्जी दस्तावेजों पर बनवाए गए पास्टपोर्ट का मामला सामने आने के बाद पड़ताल में पता चला है कि डबरा के बौद्ध मठ के पते पर 17 पासपोर्ट बने हैं। अभी तक जिनके फर्जी पासपोर्ट बने हैं, उन्हें दस्तावेज में बौद्ध अनुयायी बताया गया है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि किसी रणनीति से तो ये बौद्ध भिक्षु नहीं बने।कनेक्शन का पता लगाने असम गई एसटीएफ
- फर्जी पासपोर्ट मामले का मास्टर माइंड रियाज खुद बांग्लादेशी है। एसटीएफ को जानकारी मिली है रियाल चौधरी ने असम के कामरूप जिले में अपने निवास के दस्तावेज बनवा लिए थे। इसके बाद बैतूल आ गया था।
- इसी कारण बांग्लादेश कनेक्शन का पता लगाने के लिए एसटीएफ की टीम असम गई है। जिन अन्य लोगों के फर्जी पासपोर्ट बने हैं उनकी भी जानकारी निकाली जा रही है कि वे कब से भारत में रह रहे हैं। इसके पहले कहां थे।
सत्यापन की प्रक्रिया पर भी प्रश्न
- सभी पासपोर्ट वर्ष 2021 से 2023 के बीच बने थे। इस मामले में अभी तक चार आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 70 फर्जी पासपोर्ट पकड़े जा चुके हैं। इनमें डबरा के 17, भोपाल के 40, बैतूल के 11, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के एक-एक शामिल हैं।
ये पासपोर्ट बौद्ध अनुयायी बताकर बौद्ध मठों के पते से बनवाए गए थे। इसके लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया था। इन दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं। एसआइटी सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की भी जांच कर रही है।
