Report by manisha yadav
फोकस कीवर्ड: खाद्य विभाग
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ ब्लॉक में खाद्य विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासकीय उचित मूल्य दुकान की एक महिला विक्रेता ने खाद्य निरीक्षक विद्यानंद पटेल के खिलाफ थाने सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत देकर कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
महिला विक्रेता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी का दबाव बनाकर उससे ₹15 हजार की राशि ली गई। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे बार-बार फोन किया जाता था और व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए दबाव बनाया जाता था। महिला ने इसे मानसिक प्रताड़ना बताते हुए अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
कलेक्टर और खाद्य मंत्री से भी शिकायत
बताया जा रहा है कि महिला विक्रेता ने मामले की शिकायत स्थानीय थाने के अलावा कलेक्टर, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंचाई है।
शिकायत के साथ कथित तौर पर कुछ मोबाइल चैट और ऑनलाइन भुगतान से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और उनकी प्रमाणिकता की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
महिला की शिकायत में क्या-क्या आरोप हैं?
- 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी को लेकर दबाव बनाने का आरोप।
- ₹15 हजार की राशि लिए जाने का दावा।
- बार-बार फोन करने का आरोप।
- व्यक्तिगत मुलाकात के लिए दबाव बनाने की शिकायत।
- मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप।
- मोबाइल चैट और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े दस्तावेज देने की बात।
372 कुंतल खाद्यान्न की कमी भी जांच का अहम बिंदु
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल कथित 372 कुंतल खाद्यान्न की कमी को लेकर है। शिकायत में महिला ने इस कमी का उल्लेख किया है, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक स्थिति सामने नहीं आई है।
ऐसे में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित उचित मूल्य दुकान के रिकॉर्ड में वास्तव में कितनी मात्रा का खाद्यान्न दर्ज था, कितना खाद्यान्न प्राप्त हुआ और कितना वितरण किया गया। स्टॉक रजिस्टर तथा वितरण रिकॉर्ड के मिलान से इस पहलू की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शिकायत के बाद कार्रवाई का इंतजार
महिला द्वारा शिकायत किए जाने के बाद अब प्रशासन और खाद्य विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभी तक संबंधित खाद्य निरीक्षक के खिलाफ किसी स्पष्ट विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
वहीं, खाद्य निरीक्षक विद्यानंद पटेल की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया है, इसकी जानकारी भी फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए मामले के दोनों पक्षों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।
जांच से सामने आएगी सच्चाई
पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल की जा सकती है। इनमें दुकान के स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड के अलावा कथित ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल चैट और शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की भी जांच शामिल हो सकती है।
किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोप जांच पूरी होने तक आरोप ही होते हैं। इसलिए महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की पुष्टि करना और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना दोनों महत्वपूर्ण हैं।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
- 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है?
- ₹15 हजार के कथित भुगतान की पुष्टि होती है या नहीं?
- शिकायत के साथ दिए गए ऑनलाइन भुगतान दस्तावेजों में क्या जानकारी है?
- कथित मोबाइल चैट की वास्तविकता क्या है?
- खाद्य विभाग शिकायत पर क्या जांच और कार्रवाई करता है?
- संबंधित खाद्य निरीक्षक इस मामले पर क्या पक्ष रखते हैं?
फिलहाल महिला विक्रेता ने पूरे मामले में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत के बाद अब प्रशासन और खाद्य विभाग की कार्रवाई का इंतजार है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी के मामले की वास्तविक स्थिति क्या है।
