
धमतरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) की एंटी-पोचिंग यूनिट ने वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। रिसगांव परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 254-255 और छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित चिखलापानी क्षेत्र में दबिश देकर टीम ने ओडिशा के नबरंगपुर निवासी नरसिंह और मान सिंह को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी पोटाश बम से जंगली सूअर का शिकार कर उसके मांस को काटने की तैयारी में थे। मौके से दो अन्य साथी फरार हो गए, जिनकी तलाश की जा रही है।
घटनास्थल से वन विभाग ने 13 जिंदा पोटाश बम, टंगिया, चाकू, हंसिया और कट्टा बरामद किया। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पूछताछ के बाद एक ठिकाने पर छापेमारी में 29 कारतूस, बम सामग्री और विभिन्न मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक रसायन जब्त किए गए। विस्फोटक आपूर्ति करने वाले आरोपी भारत राठौर को स्वास्थ्य कारणों से कानूनी नोटिस जारी किया गया है।
शिकार के लिए संवेदनशील बना सीमावर्ती कॉरिडोर
केशकाल, कांकेर, नबरंगपुर और नगरी का सीमावर्ती इलाका पोटाश बम के जरिए वन्यजीवों के अवैध शिकार का प्रमुख हॉटस्पॉट बन चुका है। उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, बरामदगी से स्पष्ट है कि यह केवल स्थानीय स्तर का शिकार नहीं, बल्कि विस्फोटकों के बड़े अवैध नेटवर्क और आपूर्ति तंत्र से जुड़ी गतिविधि है। विभाग अब विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 के तहत भी सख्त धाराओं में कार्रवाई कर रहा है।
सुरक्षा बलों और वन्यजीवों पर दोहरा खतरा
जंगलों में बिछाए जाने वाले ये देसी पोटाश बम न केवल वन्यजीवों के लिए प्राणघातक हैं, बल्कि नियमित गश्त पर निकलने वाले वनकर्मियों और सीआरपीएफ के जवानों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं। थोड़ी सी असावधानी से ये विस्फोटक कभी भी बड़े जानलेवा हादसे का कारण बन सकते हैं।
पूर्व में पोटाश बम से हाथी की हुई थी मौत
जंगलों में शिकारी जंगली सूअरों को मारने के लिए महुआ या आटे के गोलों के भीतर पोटाश बम छिपाकर रख देते हैं। पूर्व में इसी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी थी, जब भोजन की तलाश में भटक रहे एक जंगली हाथी ने विस्फोटक लगे चारे को मुंह में दबा लिया था। चबाते ही मुंह के भीतर भीषण धमाका हुआ, जिससे हाथी का निचला जबड़ा और जीभ के चीथड़े उड़ गए थे। मुंह क्षत-विक्षत होने के कारण वह चारा खाने और पानी पीने में पूरी तरह लाचार हो गया। असहनीय दर्द और भूख से तड़पते हुए उस विशालकाय बेजुबान ने कई दिनों बाद दम तोड़ दिया था। [rashi mandal]
