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शिक्षक दिवस पर प्रियंका गोस्वामी को बड़ा सम्मान, राजभवन में राज्यपाल-सीएम ने प्रदान किया गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति अलंकरण

Report by manisha yadav

सारंगढ़। शिक्षक दिवस के अवसर पर रायपुर स्थित राजभवन में आयोजित सम्मान समारोह में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की शिक्षिका प्रियंका गोस्वामी को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया। राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र, शाल और चेक प्रदान कर सम्मानित किया।

प्रियंका गोस्वामी सारंगढ़ विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला दहिदा की प्रधान पाठक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के साथ साहित्य और तकनीक का प्रभावी समन्वय करने के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है। इससे पहले भी उन्हें राज्यपाल शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

नवाचार से बच्चों के लिए आसान बनाई पढ़ाई

प्रियंका गोस्वामी शिक्षण को बच्चों के लिए रोचक और अनुभव आधारित बनाने के लिए लगातार नए प्रयोग करती रही हैं। खासतौर पर कक्षा में अपेक्षाकृत कमजोर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं।

उन्होंने गीत, कविता, कहानी, नाटक और कठपुतली कला जैसे रचनात्मक माध्यमों को पढ़ाई से जोड़ा। इससे बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता को भी विकसित करने का प्रयास किया गया।

शिक्षा के साथ पोषण और समग्र विकास पर जोर

प्रियंका गोस्वामी ने बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके पोषण और समग्र विकास को भी अपने शिक्षकीय दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने अधिक से अधिक न्योता भोजन के लिए लोगों को प्रेरित किया।

दिव्यांग बच्चों के लिए समय-समय पर निःशुल्क भोजन सामग्री की व्यवस्था करने के साथ उन्होंने पल्स पोलियो अभियान में भी सक्रिय सहभागिता निभाई। दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने निःशुल्क समर कैंप आयोजित कर अध्यापन कार्य भी किया।

डिजिटल तकनीक से जोड़ी शिक्षा

तकनीक आधारित शिक्षण के क्षेत्र में भी प्रियंका गोस्वामी ने कई पहल की हैं। वे दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट कक्षा जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग बच्चों की पढ़ाई में करती हैं।

उन्होंने ब्लॉगिंग और रिपोर्टिंग जैसी गतिविधियों को भी शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया। इसके अलावा कैरियर काउंसिलिंग, समय प्रबंधन और रोजगारमूलक शिक्षा जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण देने का कार्य किया है।

शोध और लेखन में भी सक्रिय

प्रियंका गोस्वामी का योगदान केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में ‘सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में प्राथमिक शिक्षा में कार्यात्मक परिवर्तन’ विषय पर शोध पत्र लिखा है।

इसके अलावा बच्चों की शिक्षा से जुड़े विषय पर ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था, देखभाल और शिक्षा’ नामक पुस्तक का भी लेखन किया है। शिक्षा, साहित्य, तकनीक और संवेदनशीलता को एक साथ जोड़ने वाले उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति अलंकरण के लिए चुना गया।

शिक्षक परिवार से मिली शिक्षा और साहित्य की प्रेरणा

प्रियंका गोस्वामी का जन्म सारंगढ़ के शिक्षक रामपुरी गोस्वामी और शिक्षिका कुन्ती गोस्वामी के परिवार में हुआ। छात्र जीवन से ही मेधावी रहीं प्रियंका की प्रारंभिक शिक्षा सारंगढ़ में हुई।

उन्होंने गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिन्दी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर से डी.एड. और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय से बी.एड. की उपाधि हासिल की।

जिले के लिए गौरव का क्षण

प्रियंका गोस्वामी को मिले इस प्रतिष्ठित सम्मान पर जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि जिले की शिक्षिका को मिला यह सम्मान पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का विषय है। शिक्षा में उनके नवाचारपूर्ण प्रयास दूसरे शिक्षकों को भी रचनात्मक और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।

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